खनित्र

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खनित्र प्रजाति के पाँच पुत्रों में सबसे बड़े थे। ये बहुत ही उदार व्यक्तित्व और धर्मात्मा प्रवृत्ति के थे। इनके मन में सदा अपने भाइयों के प्रति प्रेम था, किंतु इनके चारों भाई सदैव इनके विरुद्ध षड़यंत्र रचते रहते थे। खनित्र ने अपना सम्पूर्ण राज्य पुत्र क्षुप को सौंप दिया था।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

भारतीय संस्कृति कोश, भाग-2 |प्रकाशक: यूनिवर्सिटी पब्लिकेशन, नई दिल्ली-110002 |संपादन: प्रोफ़ेसर देवेन्द्र मिश्र |पृष्ठ संख्या: 265 |

  1. (मा.पु., 115)

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