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पंचचूड़ा स्वर्ग की पाँच प्रमुख अप्सराओं में से एक है। महाभारत में नारद और पंचचूड़ा अप्सरा के मध्य वार्तालाप का उल्लेख आता है।
- नारद ने पंचचूड़ा के चरित्र, आवरण और भोग्या होने के विषय में प्रश्न किए।
- तब पंचचूड़ा ने नारी स्वभाव की अनेक रहस्यमय बातें नारद को बताई थीं।
- पंचचूड़ा ने बताया कि वे पुरुष भोग्या, चरित्र के मामले में अविश्वसनीय और रतिप्रधान स्वभाव की होती हैं।[1]
टीका टिप्पणी और संदर्भ
भारतीय संस्कृति कोश, भाग-2 |प्रकाशक: यूनिवर्सिटी पब्लिकेशन, नई दिल्ली-110002 |संपादन: प्रोफ़ेसर देवेन्द्र मिश्र |पृष्ठ संख्या: 458 |
- ↑ महाभारत, वनपर्व, अध्याय 134 शांतिपर्व, अध्याय 333, अनुशासनपर्व, अध्याय 38
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