अंधक

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Disamb2.jpg अंधक एक बहुविकल्पी शब्द है अन्य अर्थों के लिए देखें:- अंधक (बहुविकल्पी)

अंधक मधु राजा के सौ पुत्रों में ज्येष्ठ था, जो एक यादवराज था। इसी के कुल में श्रीकृष्ण पैदा हुए थे और इसी कारण 'वार्ष्णेय' कहलाए। इनका वंश 'वृष्णि वंशीय यादव' कहलाता था। ये लोग द्वारिका में निवास करते थे। प्रभास क्षेत्र में यादवों के गृह कलह में यह वंश भी समाप्त हो गया। वृष्णि-गणराज्य शूरसेन-प्रदेश में स्थित था। वृष्णियों का तथा अंधकों का प्राचीन साहित्य में साथ-साथ उल्लेख है। पाणिनि [1] में वृष्णियों तथा अंधको का उल्लेख हैं।

Seealso.gifअंधक का उल्लेख इन लेखों में भी है: वृष्णि संघ, कृष्ण, मथुरा, ब्रज का आदिम काल एवं ब्रज

अंधक का वर्णन

Blockquote-open.gif महाभारत शांति पर्व अध्याय-82:

कृष्ण:-

हे देवर्षि ! जैसे पुरुष अग्रिकी इच्छासे अरणी काष्ठ मथता है; वैसे ही उन जाति-लोगों के कहे हुए कठोर वचनसे मेरा हृदय सदा मथता तथा जलता हुआ रहता है ॥6॥

हे नारद ! बड़े भाई बलराम सदा बल से, गद सुकुमारता से और प्रद्युम्न रूपसे मतवाले हुए है; इससे इन सहायकों के होते हुए भी मैं असहाय हुआ हूँ। ॥7॥ आगे पढ़ें:-कृष्ण नारद संवाद Blockquote-close.gif


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. पाणिनि 4,1,114 तथा 6,2,34
  2. कौटिल्य का अर्थशास्त्र (पृ. 12
  3. यादवा: कुकुरा भोजा: सर्वे चान्धकवृष्णय:, त्वय्यासक्ता: महाबाहो लोकालोकेश्वराश्च ये।'महाभारत शांति. 81,29
  4. भेदाद् विनाश: संघानां संघमुख्योऽसि केशव' महाभारत शाति. 81,25
  5. मजुमदार-कार्पोरेट लाइफ इन ऐंशेंट इंडिया–पृ. 280

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