ऐसे अधम मनुज खल
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ऐसे अधम मनुज खल
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| कवि | गोस्वामी तुलसीदास |
| मूल शीर्षक | रामचरितमानस |
| मुख्य पात्र | राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान, रावण आदि |
| प्रकाशक | गीता प्रेस गोरखपुर |
| शैली | सोरठा, चौपाई, छन्द और दोहा |
| संबंधित लेख | दोहावली, कवितावली, गीतावली, विनय पत्रिका, हनुमान चालीसा |
| काण्ड | उत्तरकाण्ड |
ऐसे अधम मनुज खल कृतजुग त्रेताँ नाहिं। |
- भावार्थ
ऐसे नीच और दुष्ट मनुष्य सत्ययुग और त्रेता में नहीं होते। द्वापर में थोड़े से होंगे और कलियुग में तो इनके झुंड के झुंड होंगे॥40॥
| ऐसे अधम मनुज खल |
चौपाई- मात्रिक सम छन्द का भेद है। प्राकृत तथा अपभ्रंश के 16 मात्रा के वर्णनात्मक छन्दों के आधार पर विकसित हिन्दी का सर्वप्रिय और अपना छन्द है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में चौपाई छन्द का बहुत अच्छा निर्वाह किया है। चौपाई में चार चरण होते हैं, प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं तथा अन्त में गुरु होता है।
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टीका टिप्पणी और संदर्भ
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