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	<title>किए सुखी कहि बानी - अवतरण इतिहास</title>
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		<title>सपना वर्मा: '{{सूचना बक्सा पुस्तक |चित्र=Sri-ramcharitmanas.jpg |चित्र का नाम=रा...' के साथ नया पृष्ठ बनाया</title>
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		<updated>2016-07-21T05:00:57Z</updated>

		<summary type="html">&lt;p&gt;&amp;#039;{{सूचना बक्सा पुस्तक |चित्र=Sri-ramcharitmanas.jpg |चित्र का नाम=रा...&amp;#039; के साथ नया पृष्ठ बनाया&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;b&gt;नया पृष्ठ&lt;/b&gt;&lt;/p&gt;&lt;div&gt;{{सूचना बक्सा पुस्तक&lt;br /&gt;
|चित्र=Sri-ramcharitmanas.jpg&lt;br /&gt;
|चित्र का नाम=रामचरितमानस&lt;br /&gt;
|लेखक= &lt;br /&gt;
|कवि= [[तुलसीदास|गोस्वामी तुलसीदास]]&lt;br /&gt;
|मूल_शीर्षक = 'रामचरितमानस'&lt;br /&gt;
|मुख्य पात्र = [[राम]], [[सीता]], [[लक्ष्मण]], [[हनुमान]], [[रावण]] आदि।&lt;br /&gt;
|कथानक = &lt;br /&gt;
|अनुवादक =&lt;br /&gt;
|संपादक =&lt;br /&gt;
|प्रकाशक =[[गीता प्रेस गोरखपुर]]&lt;br /&gt;
|प्रकाशन_तिथि = &lt;br /&gt;
|भाषा = &lt;br /&gt;
|देश = &lt;br /&gt;
|विषय = &lt;br /&gt;
|शैली =[[दोहा]], [[चौपाई]], [[छंद]] और [[सोरठा]]&lt;br /&gt;
|मुखपृष्ठ_रचना = &lt;br /&gt;
|विधा = &lt;br /&gt;
|प्रकार =&lt;br /&gt;
|पृष्ठ = &lt;br /&gt;
|ISBN = &lt;br /&gt;
|भाग =&lt;br /&gt;
|शीर्षक 1=संबंधित लेख&lt;br /&gt;
|पाठ 1=[[दोहावली]], [[कवितावली]], [[गीतावली]], [[विनय पत्रिका]], [[हनुमान चालीसा]]&lt;br /&gt;
|शीर्षक 2=काण्ड&lt;br /&gt;
|पाठ 2=लंकाकाण्ड&lt;br /&gt;
|शीर्षक 3=सभी (7) काण्ड क्रमश: &lt;br /&gt;
|पाठ 3=[[रामचरितमानस प्रथम सोपान (बालकाण्ड)|बालकाण्ड‎]], [[रामचरितमानस द्वितीय सोपान (अयोध्या काण्ड)|अयोध्या काण्ड]]‎,  [[रामचरितमानस तृतीय सोपान (अरण्यकाण्ड)|अरण्यकाण्ड]], [[रामचरितमानस चतुर्थ सोपान (किष्किंधा काण्ड)|किष्किंधा काण्ड]]‎, [[रामचरितमानस पंचम सोपान (सुंदरकाण्ड)|सुंदरकाण्ड]], [[रामचरितमानस षष्ठ सोपान (लंकाकाण्ड)|लंकाकाण्ड‎]], [[रामचरितमानस सप्तम सोपान (उत्तरकाण्ड)|उत्तरकाण्ड]] &lt;br /&gt;
|भाग = &lt;br /&gt;
|विशेष =&lt;br /&gt;
|टिप्पणियाँ = &lt;br /&gt;
}}&lt;br /&gt;
{{poemopen}}&lt;br /&gt;
&amp;lt;poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
;छन्द&lt;br /&gt;
किए सुखी कहि बानी सुधा सम बल तुम्हारें रिपु हयो।&lt;br /&gt;
पायो बिभीषन राज तिहुँ पुर जसु तुम्हारो नित नयो॥&lt;br /&gt;
मोहि सहित सुभ कीरति तुम्हारी परम प्रीति जो गाइहैं।&lt;br /&gt;
संसार सिंधु अपार पार प्रयास बिनु नर पाइहैं॥&lt;br /&gt;
&amp;lt;/poem&amp;gt;&lt;br /&gt;
{{poemclose}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
;भावार्थ&lt;br /&gt;
भगवान ने अमृत के समान यह वाणी कहकर सबको सुखी किया कि तुम्हारे ही बल से यह प्रबल शत्रु मारा गया और विभीषण ने राज्य पाया। इसके कारण तुम्हारा यश तीनों लोकों में नित्य नया बना रहेगा। जो लोग मेरे सहित तुम्हारी शुभ कीर्ति को परम प्रेम के साथ गाएँगे, वे बिना ही परिश्रम इस अपार संसार का पार पा जाएँगे।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख क्रम4| पिछला=जोरि पानि सबहीं सिर नाएना |मुख्य शीर्षक=रामचरितमानस |अगला=प्रभु के बचन श्रवन}}&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
'''छन्द'''- शब्द 'चद्' धातु से बना है जिसका अर्थ है 'आह्लादित करना', 'खुश करना'। यह आह्लाद वर्ण या मात्रा की नियमित संख्या के विन्याय से उत्पन्न होता है। इस प्रकार, छंद की परिभाषा होगी 'वर्णों या मात्राओं के नियमित संख्या के विन्यास से यदि आह्लाद पैदा हो, तो उसे छंद कहते हैं'। छंद का सर्वप्रथम उल्लेख '[[ऋग्वेद]]' में मिलता है। जिस प्रकार गद्य का नियामक [[व्याकरण]] है, उसी प्रकार पद्य का छंद शास्त्र है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
{{लेख प्रगति|आधार=|प्रारम्भिक=प्रारम्भिक2 |माध्यमिक= |पूर्णता= |शोध= }}&lt;br /&gt;
==टीका टिप्पणी और संदर्भ==&lt;br /&gt;
पुस्तक- श्रीरामचरितमानस (लंकाकाण्ड) |प्रकाशक- गीताप्रेस, गोरखपुर |संकलन- भारत डिस्कवरी पुस्तकालय|पृष्ठ संख्या-458&lt;br /&gt;
&amp;lt;references/&amp;gt; &lt;br /&gt;
==संबंधित लेख==&lt;br /&gt;
{{तुलसीदास की रचनाएँ}}{{रामचरितमानस}}&lt;br /&gt;
[[Category:पद्य साहित्य]][[Category:हिन्दू धर्म ग्रंथ]][[Category:तुलसीदास]][[Category:सगुण भक्ति]][[Category:भक्ति साहित्य]][[Category:रामचरितमानस]][[Category:लंकाकाण्ड]][[Category:साहित्य कोश]]&lt;br /&gt;
__INDEX__&lt;br /&gt;
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		<author><name>सपना वर्मा</name></author>
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