बैडमिंटन

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बैडमिंटन
चिड़िया (शटलकॉक) और रैकेट
विवरण 'बैडमिंटन' रैकेट से खेला जाने वाला, एक अंतर्राष्ट्रीय खेल है।
उपनाम पूना या पूनाई
सर्वोच्च नियंत्रण निकाय बैडमिंटन वर्ल्ड फ़ेडरेशन
पहली बार खेला गया 18 वीं शताब्दी
दल के सदस्य एकल और युगल
उपकरण चिड़िया (शटलकॉक) और रैकेट
ओलम्पिक बैडमिंटन ओलम्पिक खेलों में 1992 से अब तक शामिल है।
भारत के प्रसिद्ध खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण, पुलेला गोपीचंद, साइना नेहवाल
अन्य जानकारी यदि बैडमिंटन की दोनों टीमें सहमत हो तो, खेल के मध्य में पाँच मिनट का आराम ले सकती हैं।

बैडमिंटन रैकेट से खेला जाने वाला, एक अंतर्राष्ट्रीय खेल है। बैडमिंटन उत्साह और रोमांच का खेल है, क्योंकि एक छोटी सी चिड़िया या शटलकॉक एक मैच में जीत या हार के बिंदु के लिए महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। ब्रिटिश छावनी शहर पूना में यह खेल ख़ासतौर पर लोकप्रिय रहा, इसीलिए इस खेल को पूना अथवा पूनाई के नाम से भी जाना जाता है। बैडमिंटन तीन प्रकार से खेला जाता है-

  1. एकल बैडमिंटन
  2. युगल बैडमिंटन
  3. मिश्रित युगल बैडमिंटन

इन तीनों खेलों के लिए बैडमिंटन कोर्ट की नाप 11/2 (4 सेंटीमीटर) सफ़ेद रंग या लाल रंग की रेखाओं से स्पष्ट की जाती है। युगल खेल के लिए 'कोर्ट' का आकार 44 फुट X 20 फुट तथा एकल खेल के लिए 44 फुट X 17 फुट होता है। नैट के दोनों ओर 61/2 फुट 'शार्ट सर्विस' रेखा खींची जाती है। कोर्ट को दो समान भागों में बाँटने के लिए 'साइड लाइन' के समानांतर एक रेखा खींची जाती है। कोर्ट का बायाँ आधा भाग 'बाँयी सर्विस कोर्ट' तथा दायाँ आधा भाग 'दाँयी सर्विस कोर्ट' कहलाता है। पीछे की 'गैलरी' 21/2 फुट तथा 'साईड गैलरी' 11/2 फुट होती है। भारत में प्रतिभावान बैडमिंटन खिलाड़ियों में प्रकाश पादुकोण, पुलेला गोपीचंद, अभिन श्याम गुप्ता, निखिल कानितकर, सचिन राठी, अपर्णा पोपट, साइना नेहवाल और नेहा अटवाल प्रमुख हैं।[1]

इतिहास

बैडमिंटन खेल की शुरुआत 19वीं सदी में हुई। सन् 1860 में यह खेल सर्वप्रथम बैडमिंटन हाउस में प्रस्तुत किया गया, जहाँ इस खेल को अधिकारिक रूप से 'बैडमिंटन' का नाम दिया गया। सन् 1887 तक यह खेल अंग्रेजों द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार इंग्लैंड में खेला जाता रहा। 'बैडमिंटन एसोशिएसन ऑफ़ इंग्लैंड' ने सन् 1893 में बैडमिंटन खेलने के नियम बनाए, और सन् 1899 में विश्व की पहली बैडमिंटन चैम्पियनशिप ऑल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन चैम्पियनशिप की शुरुआत की। 'अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन संघ' (विश्व बैडमिंटन संघ) की स्थापना 1934 में हुई। भारत इस संघ से 1936 में जुड़ा। भारत में बैडमिंटन का खेल बहुत लोकप्रिय है। बैडमिंटन खेल एक ऐसा खेल है जो हर उम्र के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। भारत में बैडमिंटन के कई महान एकल खिलाड़ी हुए हैं, लेकिन भारतीय बैडमिंटन को सही मायने में दुनिया के सामने लाने का श्रेय जाता है- प्रकाश पादुकोण को, जिन्होंने 1981 के 'क्वालालांपुर विश्व कप फाइनल' में चीन के सुपरस्टार 'हान जियान' को 15-0 से हराकर चीनियों के सपनो को ध्वस्त कर दिया था।[1]

खेल के नियम

स्मरणीय तथ्य
युगल खेल के लिए बैडमिंटन कोर्ट का आकार 44 X 20
एकल खेल के लिए बैडमिंटन कोर्ट का आकार 44 X 17
ज़ाल की चौड़ाई 2 फुट 6 इंच
केन्द्र में जाल की भूमि से ऊँचाई 5 फुट
बल्लियों पर जाल की ऊँचाई 5 फुट 1 इंच
शटलकॉक का वज़न 4.73 ग्राम से 5.50 ग्राम
शटलकॉक के पंखों की लम्बाई 21/2 से 23/4
शटलकॉक के पंखों की संख्या 14 से 16
युगल खेल में अंकों की संख्या 15 या 21 अंक
महिलाओं के एकल खेल में अंक 11 अंक

बल्लियाँ

बैडमिंटन के नैट को तान कर रखने के लिए दो बल्लियाँ लगाई जाती है। ये बल्लियाँ फ़र्श से 5 फुट 1 इंच (1.55मीटर.) ऊँची होनी चाहिए।

जाल

शटलकॉक

खिलाड़ी

बैडमिंटन के युगल खेल के प्रत्येक पक्ष में दो खिलाड़ी तथा एकल खेल के प्रत्येक पक्ष में एक खिलाड़ी होता है, मिश्रित युगल में प्रत्येक पक्ष में एक महिला और एक पुरुष होता है। खेल के शुरू में जो टीम पहले 'सर्विस' करेगी, इस टीम की साइड को 'इन साईड' और विरोधी टीम की साईड को 'आऊट साईड' कहते हैं।

टॉस

खेल प्रारम्भ होने से पहले दोनों पक्षों द्वारा टॉस किया जाता है। टॉस जीतने वाला पक्ष निम्नलिखित का चुनाव करेगा-

  1. पहले सर्विस करना
  2. पहले सर्विस न करना
  3. दिशा का चुनाव करना
बैडमिंटन नेट

शेष बातों का चुनाव टॉस हारने वाला पक्ष करेगा।

स्कोर

दिशाएँ बदलना

चिड़िया (शटलकॉक)
  1. 15 अंकों वाले खेल में 8 पर।
  2. 11 अंकों वाले खेल में 6 पर।
  3. 21 अंकों वाले खेल में 11 पर।

युगल खेल

बैडमिंटन खेल में पहले सर्विस करने वाले पक्ष का निर्णय हो जाने पर दूसरे पक्ष के दायें अर्द्ध क्षेत्र का खिलाड़ी खेल शुरू करेगा। वह दायें अर्द्ध क्षेत्र के विपक्षी को सर्विस देगा। यदि विपक्षी खिलाड़ी शटलकॉक के भूमि से स्पर्श करने से पहले उसे वापिस कर दे तो, खेल आरम्भ करने वाला खिलाड़ी फिर उसे वापिस करेगा। इस प्रकार खेल तब तक जारी रहेगा, जब तक कि 'फाऊल' न हो जाए या शटलकॉक खेल में न रहे। 'सर्विस' वापिस न होने अथवा विपक्षी द्वारा फाऊल होने की दशा में सर्विस करने वाला एक अंक जीत जाएगा। सर्विस करने वाले पक्ष के खिलाड़ी अपना क्षेत्र बदलेंगे। अब सर्विस करने वाला बायें अर्द्धक में रहेगा तथा सामने की ओर दायें अर्द्धक का खिलाड़ी सर्विस प्राप्त करेगा। प्रत्येक पारी के आरम्भ में प्रत्येक टीम पहली सर्विस दायें अर्द्ध क्षेत्र से करेगी।

एकल खेल के लिए

सर्विस सम्बन्धी अन्य नियम

रैकेट

साधारण नियम

खेल में आराम

यदि बैडमिंटन की दोनों टीमें सहमत हो तो, खेल के मध्य में पाँच मिनट का आराम ले सकती हैं।

त्रुटियाँ


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शोध

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 बैडमिंटन में बुलंद भारत (हिन्दी) (एच.टी.एम.एल) sports world। अभिगमन तिथि: 11 फ़रवरी, 2011।

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