चण्‍डीगढ़

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चण्‍डीगढ़
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जनसंख्या 900,635
· घनत्व 7,900 /sqkm
क्षेत्रफल 114 वर्ग किमी
· ग्रीष्म 44 °C
· शरद 1 °C
वर्षा 1110.7 मिमी
मुख्य पर्यटन स्थल केपिटल कॉम्प्लेक्स, पिंजौर गार्डन, रोज़ गार्डन, सुखना झील
लिंग अनुपात 1000:777 ♂/♀
साक्षरता 81.9 %
बाहरी कड़ियाँ अधिकारिक वेबसाइट
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चंडीगढ़ उत्तर भारत का प्रमुख शहर है जो तीन ओर से पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से लगा हुआ हैं। स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की कल्पना के इस शहर को मूर्त रूप देने का कार्य भार एक फ्रेंच आर्किटेक्ट ली कार्बूजिए को दिया गया था। कार्बूजिए ने जेनेरेट और मैक्सवेल व जेनड्रेन नामक दंपती के सहयोग से इस नगर का निर्माण किया। इसका नियोजन करते हुए इस बात का ध्यान रखा कि यहाँ आधुनिक युग की सभी सुविधाओं के साथ-साथ प्राचीन संस्कृति और परंपराएं भी हैं। यहाँ चौड़ी सपाट सड़कों पर प्राकृतिक सौंदर्य देखा जा सकता है।

रॉक गार्डन, चंडीगढ़

चंडीगढ़ आधुनिक शिल्‍पकला वैभव से संपन्‍न प्रदेश है। शिवालिक पहाडियों की नयनाभिराम तलहटी में बसा चंडीगढ़ वास्‍तविक अर्थों में एक ख़ूबसूरत शहर है। फ्रांसीसी वास्‍तुशिल्‍पी 'ला कार्बूजिए' द्वारा निर्मित यह शहर आधुनिक स्‍थापत्‍य कला तथा नगर नियोजन का शानदार उदाहरण है। चंडीगढ़ और उसके आसपास के क्षेत्र को पहली नवंबर, 1966 को केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया। यह हरियाणा और पंजाब दोनों की राजधानी भी है। इसके उत्तर और पश्चिम में पंजाब तथा पूर्व और दक्षिण में हरियाणा है।

स्थिति और भूगोल

इस शहर की ख़ासियत है स्वच्छता। चंडीगढ़ के लोग खुद अपने शहर की सफाई के प्रति बहुत सतर्क रहते हैं। समुद्रतट से 365 मीटर की ऊंचाई पर स्थित 114 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैले सन् 1953 में निर्मित इस शहर में कभी जनसंख्या इतनी कम थी कि सिर्फ़ सुबह 9.30 बजे और शाम पांच बजे कार्यालयों की छुट्टी के समय ही लाल बत्ती पर लोगबाग़ दिखते थे। बहुत ही शांत माना जाता है यह शहर। कई लोग तो इसे पत्थरों का शहर भी कहते हैं। उनका मानना है कि यह बसाया हुआ शहर है और इसकी कोई आत्मा नहीं है। इसके लोगों की आर्थिक स्थिति का अंदाज उनके रिहायशी इलाके से आंका जाता है। हर सेक्टर एबीसीडी चार भागों में विभक्त है। ए-बी अभिजात्य, सी मध्यम और डी निम्न मध्यमवर्गीय लोगों के लिए। मुग़ल शैली की भवन निर्माण कला का अध्ययन करने आए विदेशी पत्रकार कार्ल लुडगिस्ट चंडीगढ़ को एक नज़र देखने के बाद अभिभूत रह गए थे।

चंडीगढ़ के चीफ कमिश्नर रह चुके स्व. एम.एस. रंधावा की फूलों और पेड़-पौधों में विशेष रुचि थी। उन्होंने सारे शहर में सड़कों के किनारे वीथियों पर अमलतास, गुलमोहर, सावनी, पोयनसंटिया, कचनार के पेड़ इस प्रकार लगवाए कि सड़कों के किनारे लगे ये पेड़ हर मौसम में फूलों से लदे दिखें और आते-जाते लोगों का झुककर स्वागत करें। यहाँ हर चौराहे को अत्यंत उत्कृष्ट सजावटी पौधों से इस प्रकार संवारा गया है कि पर्यटक शहर में क़दम रखते ही सफ़र की थकान भूल जाते हैं।

जलवायु

प्रशासनिक व्यवस्था

चंडीगढ़ प्रशासन मुख्यत: चार उद्देश्यों को लेकर आगे बढ़ रहा है।

  1. इसका उद्देश्‍य सूचना और प्रौद्योगिकी मदद से सुगम और पारदर्शी प्रशासन देना है। यह सूचना अधिकार क़ानून के प्रावधानों को सबसे पहले लागू करने वाले राज्यों में से है। कई सेवाएं, जिनके लिए पहले लोगों को सरकारी दफ़्तरों के चक्‍कर लगाने पडते थे, अब कंप्‍यूटर और मोबाइल फ़ोन पर उपलब्‍ध हैं। सारे नियमों की इस दृष्टि से समीक्षा की जाती है कि उन्‍हें किस प्रकार से सरल बनाया जाए जिससे वे आम आदमी के अनुकूल हो सकें।
  2. प्रशासन आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्‍साहित करके आर्थिक ज्ञान पर आधारित उद्योग, उच्‍चस्‍तरीय वाणिज्यिक कार्यकलाप जैसी अधिक मूल्‍यवर्द्धक सुविधाएं प्रदान विकास की उच्‍च दर प्राप्‍त करने के लिए काम कर रहा है। चंडीगढ़ में प्रति व्‍यक्ति आय पहले से ही देश में सबसे ज्‍यादा है और सरकार चाहती है कि उस आधार को सुधारा जाए।
  3. प्रशासन बिजली आपूर्ति, जल आपूर्ति, स्‍वास्‍थ्‍य और शिक्षा सेवा जैसी मूलभूत सेवाएं और सार्वजनिक परिवहन की ऐसी सेवाएं प्रदान करना चाहता है जो उन्‍नत देशों के मुक़ाबले की है।
  4. प्रशासन इस वास्‍तविकता के प्रति पूरी तरह सचेत है कि विकास का लाभ प्रत्‍येक व्‍यक्ति तक समान रूप से नहीं पहुंचता है। इसलिए इस बात पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है कि विकास उन लोगों तक पहुचें जहां अभी तक नहीं पहुंच पाया है।

कृषि और सिंचाई व्यवस्था

चंडीगढ़ में कृषि योग्‍य बहुत कम है। चंडीगढ़ शहर के विस्‍तार के लिए कृषि भूमि धीरे-धीरे अधिग्रहीत की जा रही है और कृषि-क्षेत्र, जो 1966 में 5,441 हेक्‍टेयर था, 2002-03 में घटकर 1,400 हेक्‍टेयर रह गया है। सिंचाई का मुख्‍य स्रोत प्रशासन द्वारा स्‍थापित गहरे बोर वाले ट्यूबवैल तथा किसानों द्वारा लगाए गए साधारण ट्यूबवैल हैं। यहाँ की मुख्‍य फ़सल गेहूँ है जो 700 हेक्‍टेयर में बोया जाता है। यहाँ के कृषि विभाग ने फ़सल कटाई की तकनीक को सुधारने के लिए निम्‍न उपाय किए हैं-

  1. किसानों का प्रशिक्षण
  2. बागवानी का विकास
  3. मृदा व जल संरक्षण।
  4. उद्योग

विद्युत व्यवस्था

उच्च न्यायालय, चंडीगढ़

सूचना प्रौद्योगिकी

रोज़ गार्डन, चंडीगढ़

ऊर्जा और बिजली

ग्रामीण विकास

रॉक गार्डन, चंडीगढ़

वाणिज्‍य और व्‍यापार

व्यापारियों के लिये अनुकूल वातावरण बनाने के उद्देश्‍य से सभी बड़े फैसले उनसे परामर्श करके लिए जाते हैं। चंडीगढ प्रशासन ने उत्‍पाद शुल्‍क नीति 2006-07 को लागू करने से पहले इस पर जनता की राय ली है। भारत सरकार के 'खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग मंत्रालय' उत्‍पाद शुल्‍क तथा अन्‍य करों की चोरी की जांच करेगी और प्रशासन की राजस्‍व को बढाएगी।

खेलकूद और प्रतियोगिताएं

सामाजिक कल्‍याण

सुखना झील, चंडीगढ़

स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं

शिक्षा

गांधी भवन, चंडीगढ़

प्रशासन

विधानसभा परिसर, चंडीगढ़

परिवहन

चंडीगढ़ बस

आवास योजना

चंडीगढ़ का दृश्य

नगर निगम

चण्‍डीगढ़ युद्ध स्मारक

पर्यटन

कॅपिटल कॉम्प्लॅक्स

इस परिसर में हरियाणा और पंजाब के अनेक प्रशासनिक भवन हैं। विधानसभा, उच्च न्यायालय और सचिवालय आदि इमारतें यहाँ हैं। यह परिसर समकालीन वास्तुशिल्प का एक बहुत सुन्दर उदाहरण है। यहाँ का ओपन हैंड स्मारक कला का उत्तम नमूना है।

पिंजौर रॉक गार्डन
रॉक गार्डन, चंडीगढ़

चंडीगढ़ आने वाले पर्यटकों को रॉक गार्डन अवश्य देखना चाहिए। इस गार्डन का निर्माण श्री नेकचंद ने किया था। इसे बनवाने में औद्योगिक और शहरी कचरे का इस्तेमाल किया गया है। पर्यटकों के लिए यहाँ मूर्तियों, मंदिरों, महलों आदि का आकर्षण है। हर साल इस उद्यान को देखने हज़ारों पर्यटक आते हैं। उद्यान में झरनों और जलकुंड के अलावा ओपॅन एयर थियेटर भी देखा जा सकता, जहां अनेक प्रकार की सांस्कृतिक गतिविधियां होती हैं।

रोज़ गार्डन

'ज़ाकिर हुसैन रोज़ गार्डन' के नाम से विख्यात यह उद्यान एशिया का सबसे बड़ा रोज़ गार्डन है। यहाँ गुलाब की 1600 से भी अधिक किस्में हैं। उद्यान को बहुत सुन्दरता से डिजाइन किया गया है। अनेक प्रकार के रंगीन फव्वारे इसकी सुंदरता को बढ़ाते हैं। हर साल यहाँ गुलाब पर्व आयोजित होता है। श्री रंधावा ने ही चीफ इंजीनियर और आर्किटेक्ट के साथ मिलकर इस रोज़ गार्डन को ऐसा रूप दिया कि यह गार्डन एक घाटी का आभास देता है। अब यह सुबह की सैर के लिए बेहतरीन सैरगाह है। रोज़ गार्डन में हर वर्ष रोज़ फेस्टिवल नाम से एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें सांस्कृतिक संध्या के अतिरिक्त दिन भर रोज़ मेले में बच्चों के लिए मिस रोज़, मिस्टर रोज़ और विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। प्रतिवर्ष लगने वाले इस रोज़ फेस्टिवल में आने वाले 40 हज़ार से अधिक लोगों के उत्साह को देखकर फूलों और बागों के प्रति चंडीगढ़वासियों के प्रेम को समझा जा सकता है।

सुखना झील

यह मानव निर्मित झील 3 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में है। इसका निर्माण 1958 में हुआ था। अनेक प्रवासी पक्षियों का यहाँ आना होता है। झील में बोटिंग का आनंद लेते समय दूर-दूर फैली पहाड़ियों के सुंदर नज़ारों के साथ-साथ सूर्यास्त का नज़ारा भी यहाँ बड़ा मनमोहक दिखाई देता है।

कार्बूजिए ने शिवालिक की पहाडि़यों के दामन में बहते बरसाती बड़े नदी जैसे चौ पलाली का रो (नाला) और सुखना चौ पर इस प्रकार बांध बनाया जिससे बरसाती पानी शहर में न फैले। उस बांध पर चालीस फुट का एक पैदल रास्ता बनाया गया। इसके चारों ओर पेड़-पौधों को बड़ी संख्या में लगाया गया है। यहाँ कटावदार सीढि़यां हैं किन्तु यह आम रास्ता नहीं है। यह उम्दा और ख़ूबसूरत सैरगाह है जो नगरवासियों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी यह आकर्षण का केंद्र है।

सुखना झील, चंडीगढ़

इस प्रकार सेक्टरों में बंटे चंडीगढ़ नगर के पहले सेक्टर का निर्माण हुआ जो एक झील के नाम से विख्यात हुआ। शहर के प्रमुख टाउन प्लानर नरेन्द्र सिंह लांबा और चीफ इंजीनियर जे.सी. वर्मा ने सुखना झील को इस प्रकार बनवाया कि यह चंडीगढ़ के निवासियों की मनपसंद सैरगाह बन गयी। आज भी सुबह-शाम के समय यहाँ लोगों को सैर करते देखा जा सकता है।

सन 1958 में बनी तीन कि.मी. लंबी इस झील के आसपास 2452 हेक्टेयर ज़मीन पर पेड़-पौधों की हरियाली है कि डूबते सूर्य और उमड़ते- घुमड़ते बादलों के झुरमुट को पर्यटक अपने कैमरे में क़ैद कर लेने को सदैव तत्पर रहते हैं।

आम फ़ॅस्टिवल

सुखना झील पर हर वर्ष आम फ़ॅस्टिवल का आयोजन किया जाता है। कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के अलावा सावन की तीज के झूले भी यहाँ पड़ते हैं। चंडीगढ़ आने वाले पर्यटकों का यह सर्वाधिक प्रिय स्थल है। सायबेरियन पक्षियों की सर्दियों की शरणस्थली सुखना झील में मोटरबोटिंग की सख्त मनाही है, लेकिन नौका विहार, स्कीइंग और पानी के अन्य खेल यहाँ खेले जा सकते हैं।

लॅश्ज़र वैली

सेक्टर-10 में 20 एकड़ भूमि में फैली है यह घाटी। यहाँ वोगनवेला की 3000 से भी अधिक किस्में देखी जा सकती हैं। यहाँ हर वर्ष वोगनविला शो का आयोजन भी किया जाता है। सेक्टर 10 में ही स्थित 'गवर्नमेंट म्यूज़ियम' और आर्ट गैलरी भी यहाँ आने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। इस संग्रहालय में गांधार शैली की बौद्धकालीन प्रतिमाओं के अलावा राजपुर, कांगड़ा, पहाड़ी और मुग़ल शैली की कलाकृतियां भी देखी जा सकती हैं।

बॉटेनिकल गार्डेन

सुखना झील और रॉक गार्डन के बीचोबीच 88 एकड़ भूमि पर बना है वनस्पति जगत का यह अनुपम गार्डन जो पेड़-पौधों में रुचि रखने वालों के लिए अच्छा पर्यटन स्थल है।

रॉक गार्डन

सेक्टर एक में मौजूद यह गार्डन एक व्यक्ति के एकल प्रयास का अनुपम और उत्कृष्ट नमूना है, जो दुनिया भर में अपने अनूठे उपक्रम के लिए बहुत सराहा गया है। रॉक गार्डन के निर्माता नेकचंद एक कर्मचारी थे जो दिन भर साइकिल पर बेकार पड़ी ट्यूब लाइट्स, टूटी-फूटी चूडि़यों, प्लेट, चीनी के कप, फ्लश की सीट, बोतल के ढक्कन व किसी भी बेकार फेंकी गई वस्तुओं को बीनते रहते और उन्हें यहाँ सेक्टर एक में इकट्ठा करते रहते। धीरे-धीरे फुर्सत के क्षणों में लोगों द्वारा फेंकी गई फ़ालतू चीज़ों से ही उन्होंने ऐसी उत्कृष्ट आकृतियों का निर्माण किया कि देखने वाले दंग रह गए। नेकचंद के रॉक गार्डन की कीर्ति अब देश-विदेश के कलाप्रेमियों के दिलों में घर कर चुकी है।

संग्रहालय

चंडीगढ़ में अनेक संग्रहालय हैं। यहाँ का सरकारी संग्रहालय और कला दीर्घा में गांधार शैली की अनेक मूर्तियों का संग्रह है। यह मूर्तियां बौद्ध काल से संबंधित हैं। संग्रहालय में अनेक लघु चित्रों और प्रागैतिहासिक कालीन जीवाश्म को भी रखा गया है। अन्तर्राष्ट्रीय डॉल्स म्युजियम में दुनिया भर की गुडियाओं और कठपुतियों को रखा गया है।

सुखना वन्यजीव अभयारण्य

लगभग 2600 हेक्टेयर में फैले इस अभयारण्य में बड़ी संख्या में वन्यजीव और वनस्पतियां पाई जाती हैं। मूल रूप से यहाँ पाए जाने वाले जानवरों में बंदर, ख़रग़ोश, गिलहरी, साही, सांभर, भेड़िए, जंगली सूकर, जंगली बिल्ली आदि शामिल हैं। इसके अलावा सरीसृपों की अनेक प्रजातियां यहाँ हैं। अभयारण्य में पक्षियों की विविध प्रजातियों भी पायी जाती है।

चंडिका देवी

शक्ति की देवी चंडिका देवी का मंदिर जो कालका-चंडीगढ़ मार्ग पर स्थित है, हिंदुओं की प्रिय धर्मस्थली है।


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